मस्तक पर तिलक लगाने के फायदे जानकर आप भी लगायेंगे तिलक

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भाल अर्थात कपाल पर तिलक लगाने की परम्परा हिन्दू धर्म संस्कृति में अनादि काल से चली आ रही है ! यह सामाजिक सांस्कृतिक, धार्मिक एंव आद्यत्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है ! यह व्यक्ति के व्यक्तियत्व को एक गरिमा प्रदान करता है ! मन- मस्तिष्क को शांति शीतलता प्रदान करता है ! शरीर की पवित्रता का परियाचक भी है ! मनोविज्ञानिक दृष्टि से भी तिलक लगाने की महिमा है ! हिन्दू दर्शन , हिन्दू जीवन शैली एंव मान्यता में व्यक्ति मन , बुद्धि, शरीर व् आत्मा का पुंज है ! मनुष्य के अंतः करण में ब्रम्हा का वास है , शरीर एक मंदिर है ,इसे साफ़ सफाई स्नान आदि द्वारा सुध व् पवित्र बनाये रखना अति आवशयक है !
भाल पर तिलक इन सबका द्योतक है ! भारत में हिन्दू , कपाल या मस्तक पर विभिन्न विधि-विधाओं द्वारा तिलक धारण करके जीवन को धन्य मानते है ! तिलक भृकुटि पर यानि दोनों भोहों के मध्य त्रिवेणी स्थान अर्ताथ आज्ञाचक्र पर लगाया जाता है ! इसी स्थान पर महिलाये टिका बिंदी लगाती है ! अनेक महिलाये विशेष अवसरों पर नाक के ऊपर से भृकुटि से होते कपाल और मांग तक तिलक टिका भरती है !
माथे पर तिलक लगाने का महत्व प्रतिपादित करते हुए शास्त्रकारों ने बताया है की मानव मस्तिष्क में साथ सूक्ष्म ऊर्जा केंद्र है , जो असीम शक्ति के भंडार है , उन्हें चक्र कहा जाता है ! माथे के सामने के बिच स्थान पर आगा चक्र है यह इड़ा पिंगला व् सुषुंना नाड़ी का संगम स्थान है , अतः यह हमारे शरीर का महत्वपूर्ण स्थान है हमारी चेतना का प्रमुख स्थल है !



पूजा अर्चना बिना तिलक लगाए नहीं की जाती ! तिलक लगाने के समय सर पर एक हाथ रखने की परम्परा है यह भी मैं मस्तिष्क शांत रखने की प्रक्रिया है ! विष्णुवों के तिलक के मध्य भगवन विष्णु व् लक्ष्मी का निवास स्थान है !
सनातन धर्म व् हिन्दू मान्यता के अनुसार मस्तक पर तिलक शुभ मन जाता है ! यह सात्विकता प्रदान करने के साथ ही विजयश्री प्राप्त करने का उद्देश्य पूरा करता है ! अतिथि आगमन , पर्व त्योहार व्ये यात्रा पर जाने के समय तथा तीर्थ स्थानों पर मंगल तिलक लगाने का प्रचलन है ! देवी पूजा के बाद तिलक लगाने से आशीर्वाद की प्राप्ति होती है ! लाल रंग का तिलक ऊर्जा प्रदान करता है !
सामान्य : तिलक चन्दन , कुंकम ,मिटी , हल्दी भस्म ,रोली सिंदूर और गोपी चन्दन आदि का लगाया जाता है ! तिलक को दिखावे के रूप में प्रस्तुत नहीं करना है तो जल से भी तिलक लगाए जाने का शास्त्रोक्त विधान है ! वैसे चन्दन तिलक के कई प्रकार है जैसे हरिचंदन ,गोपी चन्दन ,श्वेतचन्दन ,गोकुलचंदन ,गोमतीचंदन आदि !
मान्यता अनुसार तिलक लगाने से फल प्राप्त होता है व्यक्तित्व आकर्षक और प्रभावशाली होता है ,मस्तक पीड़ा में कमी आती है ज्ञान तंतु सयंमित व् क्रियाशील रहते है ! हल्दी युक्त तिलक से त्वचा स्वस्थ व् सुन्दर होती है ! चन्दन का तिलक लगाने से व्यक्ति पापयुक्त होता है ! मानसिक शांति व् ऊर्जा प्राप्ति के लिए चन्दन प्रभावकारी होता है ! चन्दन से कई प्रकार के मानसिक रोगों से मुक्ति प्राप्त होती है !
मत पंथ सम्प्रदाय की मान्यतानुसार नहीं तिलक लगाने का विधान है ! श्री सम्प्रदाय तिलक के रूप में वि आकार का लगते है जो विष्णु के चरणों का प्रतिक है तथा बीच में लाल रेखा खींचते है जो लक्ष्मी का परिचालक है ! श्री वल्ल्भ सम्रदाय भल पर एक खड़ी लाल रेखा खींचते है जो यमुना की प्रतीक मणि जाती है !



यमुना जी गोवर्धन जी की बहन मानी जाती है ! माधव सम्परदाय के लोग भगवान श्री कृष्ण के चरणों का प्रतिरूप दो खड़ी रेखाओ को तिलक के रूप में धारण करते है ! इन दो रेखाओ के बीच में एक काली रेखा बनाई जाती है ! काली रेखा की निचे एक पीला अथवा लाल बिन्दु बनाते है जो माता लक्ष्मी अथवा श्री राधा का सूचक है ! गोपी चन्दन के तिलक को विशेष महत्व देता है ! ये लोग वृन्दावन की माटी का तिलक बी लगते है ! द्वारिका स्थित गोपितलाब की मिटटी भी तिलक के लिए प्रयोग की जाती है !