5 के पंच से आरम्भ होगा 2018 – जानिए क्या करना रहेगा शुभ

www.indian-astrologer.co.in
INDIAN ASTROLOGER BLOG




नववर्ष का शुभ आरंभ इस वर्ष पांच सयोगो से हो रहा है । पहली जनवरी को पौष एंव शाकंभरी पूर्णिमा रहेगी और शाम 4 बजे तक स्वार्थ तथा अमृत सिद्धि योग भी रहेंगे । जनवरी मास में ही पांच स्नान प्रव भी रहेंगे ।मकर सक्रांति 14 जनवरी को, अमावस्या का स्नान 16 जनवरी को , बसंत पंचमी 22 तथा 31 को पूर्णिमा स्नान भी होगा । इस वर्ष पांच ग्रहण भी लगेंगे ।
यूं तो काफी लोग साल के पहले दिन खर्च करने से घबराते है ताकि सारा साल खर्च न होता रहे । परन्तु सिद्दी योगो में शुभ कार्य हेतु खर्च करना लाभदायक होता है । ये आप तारा डूबने के कारण विवाह सबंधी वस्तुए नहीं खरीद रहे है तो पहली जनवरी सोमवार के दिन खरीद सकते है । नया साल भगवन शिव के दिन मिथुन राशि , मृगशिरा नक्षत्र से आरम्भ हो रहा है । इस दिन शनि सूर्य तथा शुक्र धनु राशि में होंगे और गुरु व् मंगल में तुला में एंव बुध वृश्चिक राशि में रहेंगे ।राहु कर्क तथा केतु मकर में रहेंगे । वृश्चिक धनु व् मकर राशि वाले साढ़ेसाती के प्रभाव में पहले से है । 2018 में नव संवत 2075 के अनुसार राजा सूर्य तथा शनि मंत्री होंगे जो एक दूसरे के परस्पर शत्रु गृह है। इस गठबंधन से जनता में तनाव बढ़ेगा , परन्तु न्यायपालिका सशक्त रहेगी । एहतिहासिक व् अप्रत्याशित फैसलों के लिए देश को तैयार रहना होगा । इस साल पांच ग्रहण लगेंगे :
चंद्र ग्रहण – 31 जनवरी
सूर्य ग्रहण -15 / 16 फरवरी
सूर्य ग्रहण – 13 जुलाई
चंद्र ग्रहण – 27 / 28 जुलाई
सूर्य ग्रहण -11 अगस्त


नए साल पर लाये सुख समृद्धि और करे धन वृद्धि : यदि नए साल ,या नए विक्रमी संवत , इस साल -18 मार्च पर बैंक में नया खाता खोला जाये या पुराने खाते में धन जमा कराया जाये तो धन में निरंतर वृद्धि होगी । इस दिन कोई भी किया गया नया निवेश कई गुना बड़ा जाता है।आप नै बीमा पालिसी म्यूच्यूअल फन ,सोने आदि में पहले दिन धन लगा सकते है । इसके अतिरिक्त बैंक या घर के लाकर में , लाल या पिले कपडे में 12 साबुत बादाम बांध कर रख दिए जाते तो भी आभूषणों में वृद्वि रहती है और उसमे कभी भी कमी नहीं आती । ये काफी समय से एक प्रमाणित प्रयोग है जो काफी समय से भारतीय परम्परा आस्था एंव ज्योतिष का एक भाग रहे है ।इस दिन लोन अकाउंट में पैसे न लौटाए , न किसी को उधार दे और न किसी से ले ।

किस वार को किस रंग का तिलक करे -सात दिवसीय तिलक

www.indina-astrologer.co.in
INDIAN ASTROLOGER BLOG





ज्योतिष शास्त्र अनुसार एक सप्ताह के सात दिनों के लिए अलग -अलग तिलक लगाने का विधान है । इसके अनुसार तिलक लगाने से उसदिन का गृह गोचर अनुकूल होकर फलदायी बन जाते है ।
सात दिवसीय तिलक –
सोमवार – यह महादेव शिव शंकर का दिन है । इस दिन के स्वामी चन्द्रमा है । अत: स्वेत चन्दन का तिलक लगाने से मन शांत व् सिथिर रहता है । इस दिन शिव जी को प्रसन्न करने वाले भस्म का तिलक भी लगा सकते है ।
मगलवार – यह संकट मोचन हनुमान जी का दिन है , मगल गृह इस इन का स्वामी है । लाल चन्दन अथवा चमेली के तेल के साथ सिन्दूर मिलकर तिलक लगन शुभ है जो ऊर्जा बनाये रखता है और निराशा दूर करता है ।
बुधवार – माँ भगवती दुर्गा के इस दिन को गणपति गणेश जी का दिन भी मन जाता है । इस दिन के स्वामी बुध गृह है । अत : इस दिन सूखा सिन्दूर लगाने से बौद्धिक क्षमता का विकास होता है ।
बृहस्पतिवार – वीरवार देवगुरु बृहस्पति का दिन है । इस दिन पिले रंग का अथवा पिले श्वेत मिश्रित रंग का तिलक धारण करना चाहिए । चंदब काष्ट को पत्थर पर घिसकर उसमे केसर मिलकर माथे पर लेप करना शुभ दायक है । हल्दी व् गोरोचन का तिलक भी सुख शांति प्रदान करता है ।




शुक्रवार – यह दैत्य, दानव असुर जनो के गुरु ब्रह्मऋषि शुक्रचार्य का एंव शुक्र ग्रह का यह दिन है । इस दिन भगवन विष्णु की सहधर्मिणी लक्ष्मी का दिन भी मानते है । इस दिन लाल चन्दन का तिलक धारण करने से तनाव दूर होता है ,भौतिक सुख सुविधावो में भी वृद्धि होती है । इस दिन सिन्दूर लगाना भी शुभ है ।
शनिवार – यह वस्तुत : यमदेव- यमराज , भैरव ( काल भैरव ) के साथ ही शनि गृह के दिवस भी है । इस दिन के स्वामी भी शनि ग्रह है । इस दिन भस्म का अथवा लाल चन्दन का तिलक लगाना भी शुभकारी है । इस से ये देव प्रसन्न रहते है लाभ पहुंचते है ।
तिलक लगाने की विधि
तिलक लगाने की भी पद्द्ति है । मोक्ष प्राप्ति हेतु तिलक अंगूठे से , शत्रुनाश के लिए तर्जनी से, धन प्राप्ति के लिए मध्यमा से , और शांति प्राप्ति के लिए अनामिका से तिलक लगाने का प्रावधान है ।
अंगूठे से तिलक लगाने से भू-मध्य आज्ञाचक्र की जाग्रति होती है , वह प्रभावित होता है और सर्वदा सकरात्मक सोच तथा विशेष ऊर्जा प्राप्ति के लिए उपयोगी माना जाता है । वैसे नदी तटीय मिटटी का , पुण्य तीर्थ स्थल का, चींटी की बाम्बी तथा तुलसी के मूल (जड़) की मिटटी का भी तिलक उत्तम माना जाता है । तीर्थ स्थल, पूजन, दान कर्म , यज्ञ, होम, पितर, कर्म, जप , कर्म तथा देवी -देवता पूजन में तिलक धारण शुभ है ।



माँ दुर्गा के बारे में 5 तथ्य जो आप नहीं जानते होंगे

www.indian-astrologre.co.in
INDIAN ASTROLOGER BLOG




माँ दुर्गा को शक्ति के रूप में जाना जाता है या देवी हिंदू पौराणिक कथाओं में सबसे प्रतिष्ठित देवी देवताओं में से एक है भगतों का कहना है कि माँ ने राक्षस महाशिषुरा को मारने के लिए जन्म लिया । यह भी विश्वास है कि वह दुनिया में अच्छे और सद्भाव की रक्षक है।हम आपको माँ दुर्गा के बारे में कुछ अज्ञात तथ्य का उल्लेख करते हैं।जिन्हे जानकर माता के पार्टी आपका विश्वाश और भी दृढ़ हो जायेगा और आप भक्ति भाव से भर जायेंगे।

भगवन शिव की तरह माँ दूर्गा को “त्त्र्यंबके ” कहा जाता है जिसका अर्थ है कि वह तीन आंखों वाली देवी है। माँ के तीनों आँखों में बहुत महत्व है। बायां आंखें इच्छा की ओर इशारा करती हैं, दाईं आंख क्रिया को दर्शाती है और तीसरा या केंद्रीय आंख ज्ञान का प्रतिनिधित्व करती है

यह भी माना जाता है कि माता  हाथों में 8-10 हथियार हैं। यह हथियार 8 चौकियों या हिंदुत्व में दिशाओं का प्रतिनिधित्व करता है। लोगों का मानना ​​है कि माँ दुर्गा सभी दिशाओं से उसे बचाती हैं।

संस्कृत में, दुर्गा का अर्थ “एक किला” या एक जगह है जिसे जीतना मुश्किल है। ये नाम माँ दुर्गा को उसकी सुरक्षात्मक और विवादित प्रकृति के देवी के स्वरूप को दिया जाता है।



माँ दुर्गा को शेर की सवारी के रूप में दर्शाया गया है। यह उसकी असीमित शक्ति और दृढ़ संकल्प का प्रतीक है यह इन सभी गुणों पर अपने स्वामित्व को भी उजागर करता है। भक्तों का मानना ​​है कि उनके पास अहंकार, ईर्ष्या और घृणा को मारने की शक्ति है

वहाँ  माँ दुर्गा के नौ दिव्य रूप हैं। ये शैलपुत्री , ब्रह्मचारिणी, चन्द्रघटा , कुष्मंद, स्कंदमाता , कट्यायनी, कालत्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री हैं। नवरात्रि के दौरान सभी की पूजा की जाती है

मस्तक पर तिलक लगाने के फायदे जानकर आप भी लगायेंगे तिलक

www.ketanastrologer.com
KETAN ASTROLOGER BLOG



भाल अर्थात कपाल पर तिलक लगाने की परम्परा हिन्दू धर्म संस्कृति में अनादि काल से चली आ रही है ! यह सामाजिक सांस्कृतिक, धार्मिक एंव आद्यत्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है ! यह व्यक्ति के व्यक्तियत्व को एक गरिमा प्रदान करता है ! मन- मस्तिष्क को शांति शीतलता प्रदान करता है ! शरीर की पवित्रता का परियाचक भी है ! मनोविज्ञानिक दृष्टि से भी तिलक लगाने की महिमा है ! हिन्दू दर्शन , हिन्दू जीवन शैली एंव मान्यता में व्यक्ति मन , बुद्धि, शरीर व् आत्मा का पुंज है ! मनुष्य के अंतः करण में ब्रम्हा का वास है , शरीर एक मंदिर है ,इसे साफ़ सफाई स्नान आदि द्वारा सुध व् पवित्र बनाये रखना अति आवशयक है !
भाल पर तिलक इन सबका द्योतक है ! भारत में हिन्दू , कपाल या मस्तक पर विभिन्न विधि-विधाओं द्वारा तिलक धारण करके जीवन को धन्य मानते है ! तिलक भृकुटि पर यानि दोनों भोहों के मध्य त्रिवेणी स्थान अर्ताथ आज्ञाचक्र पर लगाया जाता है ! इसी स्थान पर महिलाये टिका बिंदी लगाती है ! अनेक महिलाये विशेष अवसरों पर नाक के ऊपर से भृकुटि से होते कपाल और मांग तक तिलक टिका भरती है !
माथे पर तिलक लगाने का महत्व प्रतिपादित करते हुए शास्त्रकारों ने बताया है की मानव मस्तिष्क में साथ सूक्ष्म ऊर्जा केंद्र है , जो असीम शक्ति के भंडार है , उन्हें चक्र कहा जाता है ! माथे के सामने के बिच स्थान पर आगा चक्र है यह इड़ा पिंगला व् सुषुंना नाड़ी का संगम स्थान है , अतः यह हमारे शरीर का महत्वपूर्ण स्थान है हमारी चेतना का प्रमुख स्थल है !



पूजा अर्चना बिना तिलक लगाए नहीं की जाती ! तिलक लगाने के समय सर पर एक हाथ रखने की परम्परा है यह भी मैं मस्तिष्क शांत रखने की प्रक्रिया है ! विष्णुवों के तिलक के मध्य भगवन विष्णु व् लक्ष्मी का निवास स्थान है !
सनातन धर्म व् हिन्दू मान्यता के अनुसार मस्तक पर तिलक शुभ मन जाता है ! यह सात्विकता प्रदान करने के साथ ही विजयश्री प्राप्त करने का उद्देश्य पूरा करता है ! अतिथि आगमन , पर्व त्योहार व्ये यात्रा पर जाने के समय तथा तीर्थ स्थानों पर मंगल तिलक लगाने का प्रचलन है ! देवी पूजा के बाद तिलक लगाने से आशीर्वाद की प्राप्ति होती है ! लाल रंग का तिलक ऊर्जा प्रदान करता है !
सामान्य : तिलक चन्दन , कुंकम ,मिटी , हल्दी भस्म ,रोली सिंदूर और गोपी चन्दन आदि का लगाया जाता है ! तिलक को दिखावे के रूप में प्रस्तुत नहीं करना है तो जल से भी तिलक लगाए जाने का शास्त्रोक्त विधान है ! वैसे चन्दन तिलक के कई प्रकार है जैसे हरिचंदन ,गोपी चन्दन ,श्वेतचन्दन ,गोकुलचंदन ,गोमतीचंदन आदि !
मान्यता अनुसार तिलक लगाने से फल प्राप्त होता है व्यक्तित्व आकर्षक और प्रभावशाली होता है ,मस्तक पीड़ा में कमी आती है ज्ञान तंतु सयंमित व् क्रियाशील रहते है ! हल्दी युक्त तिलक से त्वचा स्वस्थ व् सुन्दर होती है ! चन्दन का तिलक लगाने से व्यक्ति पापयुक्त होता है ! मानसिक शांति व् ऊर्जा प्राप्ति के लिए चन्दन प्रभावकारी होता है ! चन्दन से कई प्रकार के मानसिक रोगों से मुक्ति प्राप्त होती है !
मत पंथ सम्प्रदाय की मान्यतानुसार नहीं तिलक लगाने का विधान है ! श्री सम्प्रदाय तिलक के रूप में वि आकार का लगते है जो विष्णु के चरणों का प्रतिक है तथा बीच में लाल रेखा खींचते है जो लक्ष्मी का परिचालक है ! श्री वल्ल्भ सम्रदाय भल पर एक खड़ी लाल रेखा खींचते है जो यमुना की प्रतीक मणि जाती है !



यमुना जी गोवर्धन जी की बहन मानी जाती है ! माधव सम्परदाय के लोग भगवान श्री कृष्ण के चरणों का प्रतिरूप दो खड़ी रेखाओ को तिलक के रूप में धारण करते है ! इन दो रेखाओ के बीच में एक काली रेखा बनाई जाती है ! काली रेखा की निचे एक पीला अथवा लाल बिन्दु बनाते है जो माता लक्ष्मी अथवा श्री राधा का सूचक है ! गोपी चन्दन के तिलक को विशेष महत्व देता है ! ये लोग वृन्दावन की माटी का तिलक बी लगते है ! द्वारिका स्थित गोपितलाब की मिटटी भी तिलक के लिए प्रयोग की जाती है !